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| KANER KA FLOWER
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कनेर के फूल
कनेर के फूल खासकर गर्मियों में ही खिलते हैं। कनेर के पेड़ को कुरेदने या खरोचने से बहुतायत में दूध निकलता है। इसकी फलियां चपटी गोलाकार पांच से छ: इंच वाली होती हैं। कनेर के पौधे की जड़, सौंफ और करंज के पत्ते को पीसकर पानी में मिलाकर आंखों में लेपन करने से संबंधित रोगों में लाभ होता है।
कनेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?
पीला कनेर (Yellow Kaner) का उपयोग किस लिए किया जाता है?
पीला कनेर में एक हार्ट एक्टिव केमिकल पाया जाता है जिसे कार्डियक ग्लाइकोसाइड कहा जाता है। इस केमिकल के कुछ साइड इफेक्ट हैं लेकिन फिर भी इस हर्ब का प्रयोग कई स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग दवाई बनाने में किया जाता है। कई रोगों से राहत पाने में इसका प्रयोग किया जाता है
कनेर का जहर कैसे बनता है?जानलेवा ज़हर
कनेर का जहर डाइगाक्सीन ड्रग की तरह है. डाइगाक्सीन दिल की धड़कन की रफ्तार कम करता है. कनेर का एक बीज डाइगाक्सीन के सौ टैबलेट के बराबर होता है. पहले तो यह दिल की धड़कन को धीमा करता है और आखिरकार एकदम रोक दोता है/
कनेर के पत्ते क्या काम आते हैं?
- लाल फूल वाले कनेर की जड़ को पानी में घिसकर रोगग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है। इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोना भी लाभकारी होता है। - सफेद कनेर की जड़ को पानी में पीसकर उपदंश पर लगाने से घाव, सूजन, जलन व दर्द ठीक होता है। - 200 ग्राम कनेर के पत्ते को एक बाल्टी पानी में उबाल लें और इस उबले पानी से नहाएं।
झड़ते बालों के लिए कनेर के फूलों की पत्ते बहुत ही कारगार इलाज है
जैसे की झड़ते बालों के लिए कनेर के फूलों की पत्ते बहुत ही कारगार इलाज है और इससे प्याज की तरह जलन भी नहीं होती। कनेर के फूलों की पत्तों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिससे आपके सिर पर बाल वापस उगाए जा सकते हैं। आप भी अगर झड़ते बालों से या गंजेपन से परेशान हैं तो ये उपाय आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
कनेर
के फूलhttps://www.amazon.in/gp/product/B071Z8M4KX?ie=UTF8&tag=pkmotivationa-21&camp=3638&linkCode=xm2&creativeASIN=B071Z8M4KXकनेर के फूल खासकर गर्मियों में ही खिलते हैं। कनेर के पेड़ को कुरेदने या खरोचने से बहुतायत में दूध निकलता है। इसकी फलियां चपटी गोलाकार पांच से छ: इंच वाली होती हैं। कनेर के पौधे की जड़, सौंफ और करंज के पत्ते को पीसकर पानी में मिलाकर आंखों में लेपन करने से संबंधित रोगों में लाभ होता है।
कनेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?
पीला कनेर (Yellow Kaner) का उपयोग किस लिए किया जाता है?
पीला कनेर में एक हार्ट एक्टिव केमिकल पाया जाता है जिसे कार्डियक ग्लाइकोसाइड कहा जाता है। इस केमिकल के कुछ साइड इफेक्ट हैं लेकिन फिर भी इस हर्ब का प्रयोग कई स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग दवाई बनाने में किया जाता है। कई रोगों से राहत पाने में इसका प्रयोग किया जाता है
कनेर का जहर कैसे बनता है?जानलेवा ज़हर
कनेर का जहर डाइगाक्सीन ड्रग की तरह है. डाइगाक्सीन दिल की धड़कन की रफ्तार कम करता है. कनेर का एक बीज डाइगाक्सीन के सौ टैबलेट के बराबर होता है. पहले तो यह दिल की धड़कन को धीमा करता है और आखिरकार एकदम रोक दोता है/
कनेर के पत्ते क्या काम आते हैं?
- लाल फूल वाले कनेर की जड़ को पानी में घिसकर रोगग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है। इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोना भी लाभकारी होता है। - सफेद कनेर की जड़ को पानी में पीसकर उपदंश पर लगाने से घाव, सूजन, जलन व दर्द ठीक होता है। - 200 ग्राम कनेर के पत्ते को एक बाल्टी पानी में उबाल लें और इस उबले पानी से नहाएं।
झड़ते बालों के लिए कनेर के फूलों की पत्ते बहुत ही कारगार इलाज है
जैसे की झड़ते बालों के लिए कनेर के फूलों की पत्ते बहुत ही कारगार इलाज है और इससे प्याज की तरह जलन भी नहीं होती। कनेर के फूलों की पत्तों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिससे आपके सिर पर बाल वापस उगाए जा सकते हैं। आप भी अगर झड़ते बालों से या गंजेपन से परेशान हैं तो ये उपाय आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
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